

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के एमपी हाॅल में आयोजित किया गया योगाभ्यास। संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रो. एम.एम.गोरे, डाॅ. दिनेश सिंह, कार्यवाहक कुलसचिव डाॅ. अंबक कुमार राय समेत प्रो. आशीष कुमार सिंह, डाॅ. समीर श्रीवास्तव आदि ने की भागीदारी। [Amar Ujala 22-06-2026, Page No. 06]

[Hindustan 22-06-2026, Page No. 7]

[I Next 22-06-2026, Page No. 02]

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के छात्र गतिविधि केंद्र द्वारा संस्थान के एमपी हाल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े उत्साह एवं उमंग के साथ किया गया। [Mantra Bharat, 22-06-2026, Page No. 02]

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के नवनियुक्त निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने कहा कि संस्थान को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में बेहतर स्थान दिलाने के लिए व्यापक खाका तैयार किया जाएगा। [Amar Ujala 17-06-2026, Page No. 05]

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में रैंकिग में सुधार के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने जा रहा है। हाल ही में निदेशक पद ग्रहण करने वाले प्रो. के. उमा महेश्वर राव ने स्पष्ट किया है कि एनआईआरएफ रैंकिग में आई गिरावट को गंभीरता से लिया जाएगा और इसके सुधार के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जाएगी। [Dainik Jagaran 17-06-2026, Page No. 04]

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में रैंकिग में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू करेगा। यह बात राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला के निदेशक व एमएनएनआईटी के निदेशक का अतिरिक्त चार्ज लेने के बाद प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में कही। [Hindustan 17-06-2026, Page No. 04]

मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से रविवार को भारतीय जल कार्य संघ प्रयागराज केंद्र, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण, मेजा ऊर्जा निगम लिमिटेड, प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड और इफको के संयुक्त तत्वावधान में परिसर में पौधारोपण किया गया। इफको के महाप्रबंधक तकनीकी रत्नेश कुमार ने पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल की जरूरत पर बल दिया। निदेशक प्रो. आर.एस.वर्मा ने वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा और तकनीकी नवाचार के माध्यम से टिकाऊ भविष्य के निर्माण का आहवान किया। [Amar Ujala 08-06-2026, Page No. 02]

रसोई या रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला बचा हुआ तेल लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। यह तेल अब भविष्य का स्वच्छ ईंधन बन सकता है। मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद और वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी के विज्ञानियों ने एक ऐसी हरित तकनीक विकसित की है, जो बेकार कुंिकंग आयल को बेहद कम समय में उच्च गुणवत्ता वाले बायोडीजल में तब्दील कर देगा। इस शोध का नेतृत्व एमएनएनआईटी के रासायनिक अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डाॅ. दीपेश एस पाटले और वीआईटी के प्रो. पुंडलिक भगत ने किया। [Dainik Jagran 08-06-2026, Page No. 04]

जिस पराली को किसान अक्सर खेतों में जला देते हैं, जिस धान की भूसी, गन्ने की खोई और भूसे को अब तक कृषि कचरा माना जाता रहा है, वही आने वाले समय में लाखों लोगों के सपनों का आशियाना खड़ा कर सकती है। खेतों से निकलने वाले यह कृषि अपशिष्ट विज्ञानियों की नजर में भविष्य का निर्माण पदार्थ बन चुका है। मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद में शुरू हुई 1.16 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी परियोजना इसी दिशा में नई उम्मीद जगा रही है। परियोजना के प्रधान अन्वेषक एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अनुपम रावत और सह-अन्वेषक डाॅ. अजय मंडरवालिया है। [Dainik Jagran 05-06-2026, Page No. 07]